पंचायत चुनाव जनवरी से अप्रैल तक टाले, साफ है कांग्रेस सरकार की नीयत: संजीव कटवाल

संवैधानिक संस्थाओं से टकराव के कारण सरकार को लगा झटका, हाईकोर्ट के आदेशों से बेनकाब हुई मंशा: भाजपा

शिमला।
एडवोकेट जनरल द्वारा की गई प्रेस वार्ता पर पलटवार करते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री संजीव कटवाल ने कहा कि सरकार चाहे जितनी सफाई दे ले, लेकिन सच्चाई यह है कि पंचायती राज चुनाव जनवरी माह में होने थे, जो अब अप्रैल में कराए जा रहे हैं, और यही अंतराल इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि कांग्रेस सरकार चुनाव टालना चाहती थी।
कटवाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में बीते लंबे समय से संवैधानिक संस्थाओं और प्रदेश सरकार के बीच लगातार टकराव की स्थिति बनी रही। राज्य निर्वाचन आयोग ने बार-बार सरकार को समय पर पंचायती राज चुनाव कराने के लिए कहा, लेकिन सरकार ने हर बार किसी न किसी बहाने से इस प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया। यदि सरकार की मंशा वास्तव में चुनाव कराने की होती, तो आज उच्च न्यायालय को हस्तक्षेप कर समय-सीमा तय करने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
भाजपा प्रदेश महामंत्री ने कहा कि सरकार यह दावा कर रही है कि उसे कोई झटका नहीं लगा, जबकि वास्तविकता यह है कि उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के बाद सरकार दबाव और तनाव में है। उन्होंने कहा कि सरकार को झटका इसलिए लगा है क्योंकि उसकी मंशा उजागर हो गई है और अब उसे मजबूरी में चुनाव कराने पड़ रहे हैं।
संजीव कटवाल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने की मानसिकता से काम कर रही है। पंचायतों जैसे जमीनी लोकतंत्र को लटकाकर सरकार सत्ता के केंद्रीकरण की कोशिश कर रही थी, लेकिन भाजपा के संघर्ष और उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप से जनता का अधिकार सुरक्षित हुआ है।
उन्होंने कहा कि भाजपा शुरू से ही पंचायती राज चुनाव समय पर कराने की मांग कर रही थी और आगे भी लोकतंत्र, संविधान और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए मजबूती से खड़ी

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