पादप स्वास्थ्य प्रबंधन पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में शिक्षा–उद्योग सहयोग पर बल
सतत विकास के लिए तालमेल: पादप स्वास्थ्य प्रबंधन में अकादमिक जगत और उद्योग के बीच सहयोग को बढ़ावा’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ आज डॉ यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी में हुआ। विशेषज्ञों ने शोध और खेत-स्तर पर उसके अनुप्रयोग के बीच की खाई को पाटने के लिए शिक्षा जगत और उद्योग के बीच सशक्त साझेदारी की आवश्यकता पर जोर दिया।
इस संगोष्ठी का आयोजन हिमालयन फायटोपथोलॉजीकल सोसाइटी द्वारा विश्वविद्यालय के पादप रोग विज्ञान विभाग के सहयोग से किया जा रहा है। देशभर के विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और एग्रोकेमिकल उद्योग से 188 से अधिक प्रतिभागी इसमें भाग ले रहे हैं।
आचार्य एन.जी. रंगा कृषि विश्वविद्यालय गुन्टूर की कुलपति डॉ. आर. सारदा जयलक्ष्मी देवी इस अवसर पर मुख्य अतिथि रही। उन्होंने अपने संबोधन में वैज्ञानिक खोजों को विस्तार योग्य एवं किसान-हितैषी तकनीकों में परिवर्तित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने आधुनिक कृषि में फफूंदनाशी जैव-कीटनाशकों तथा पर्यावरण-अनुकूल रासायनिक संरक्षण की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में जैव-अवक्रमणीय, लक्षित प्रभाव वाले और कम विषाक्त कंपाउंड के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। साथ ही, नैनो-बायोफफूंदनाशकों को पारंपरिक फफूंदनाशकों के प्रभावी विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय और शोध संस्थान पादप रोगजनकों, होस्ट प्रतिरोध, आणविक निदान एवं समन्वित रोग प्रबंधन पर मूलभूत ज्ञान विकसित करते हैं, किंतु इन नवाचारों—जैसे प्रतिरोधी किस्में, जैव-फॉर्मूलेशन और डायग्नोस्टिक किट—को व्यापक स्तर पर किसानों तक पहुँचाने के लिए उद्योग के साथ सहयोग अनिवार्य है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो राजेश्वर सिंह चंदेल ने कहा कि प्राकृतिक खेती एक वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित पद्धति के रूप में उभर रही है, जो कई सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप है। उन्होंने जोर दिया कि अनुसंधान और तकनीक पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ किसानों के लिए किफायती भी होनी चाहिए। उन्होंने उद्योग से शिक्षा संस्थानों को शोध के महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में मान्यता देने का आह्वान किया और कहा कि प्रत्येक शोध प्रबंध नवाचार में परिणत होना चाहिए, जिसका व्यावहारिक और व्यावसायिक महत्व हो।
इससे पूर्व, हिमालयन फाइटोपैथोलॉजिकल सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ सतीश शर्मा ने प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने विभाग की समृद्ध विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय के सबसे पुराने विभागों में से एक है, जिसने हिमालयी क्षेत्र की समशीतोष्ण बागवानी फसलों के लिए महत्वपूर्ण तकनीकों का विकास किया है।
कॉलेज ऑफ हॉर्टिकल्चर के अधिष्ठाता डॉ मनीष शर्मा ने कहा कि तकनीकी प्रगति के बावजूद उत्पादन वैश्विक मानकों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने समन्वित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया, जो पादप संरक्षण के साथ-साथ पर्यावरणीय चिंताओं को भी संबोधित करें। उन्होंने उद्योग प्रतिनिधियों से पाठ्यक्रम में आवश्यक संशोधनों के संबंध में सुझाव देने का आग्रह किया।
निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ इंदर देव ने पादप स्वास्थ्य को कृषि का एक प्रमुख स्तंभ बताया और कहा कि रोगों के कारण लगभग 40 प्रतिशत तक फसल हानि होती है, जो खाद्य एवं पोषण सुरक्षा तथा किसानों की आजीविका के लिए गंभीर चुनौती है। सोसाइटी के सचिव डॉ अनिल हांडा ने वर्ष 2017 में स्थापित सोसाइटी की गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह सातवीं राष्ट्रीय संगोष्ठी है तथा सोसाइटी नियमित रूप से मंथन सत्र, व्याख्यान, किसान–वैज्ञानिक संवाद, क्षेत्र भ्रमण और ई-पत्रिका का प्रकाशन करती है। इस अवसर पर आयोजन सचिव डॉ भूपेश गुप्ता द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया।
संगोष्ठी में प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों, आईसीएआर संस्थानों और एग्रोकेमिकल उद्योग के विशेषज्ञ वैज्ञानिक तकनीकी सत्रों को संबोधित कर रहे हैं। इनमें समन्वित पादप स्वास्थ्य प्रबंधन, तनाव सहनशीलता हेतु उभरते जीनोमिक उपकरण, सतत रोग प्रबंधन रणनीतियाँ तथा तकनीकी हस्तांतरण को सुदृढ़ करने के उपायों पर चर्चा की जा रही है।
जलवायु परिवर्तन, भूमि क्षरण, जल संकट और बढ़ती खाद्य मांग जैसी चुनौतियों के बीच विशेषज्ञों ने दोहराया कि शिक्षा और उद्योग के बीच सहयोग नवाचार को बढ़ावा देने, तकनीकों के प्रभावी प्रसार तथा क्षेत्र-विशिष्ट समाधान विकसित करने की कुंजी है। यह संगोष्ठी कृषि उत्पादकता, सततता और खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए भावी साझेदारियों का मार्ग प्रशस्त करेगी।


Hello, Neat post. There is an issue together with your website in web explorer, would test this… IE nonetheless is the market leader and a good element of people will pass over your fantastic writing because of this problem.
I reckon something really interesting about your website so I bookmarked.
Dead written content material, regards for information. “Necessity is the mother of taking chances.” by Mark Twain.