पंचायती राज चुनाव टालने की साजिश—संविधान की अवहेलना कर रही कांग्रेस सरकार: रणधीर शर्मा

रोस्टर में छेड़छाड़ कर चुनाव प्रभावित करने का षड्यंत्र—5% नहीं, सभी सीटों पर धांधली की तैयारी

विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव से भाजपा ने उठाया मुद्दा, सरकार की नीयत और नीतियों पर गंभीर सवाल

शिमला:
भाजपा नेता एवं विधायक रणधीर शर्मा ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों को जानबूझकर टालने और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से खिलवाड़ करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने इस विषय को लेकर विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव लाकर सरकार की मंशा को उजागर करने का प्रयास किया।
रणधीर शर्मा ने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव दिसंबर 2025 या जनवरी 2026 में होने थे, लेकिन सरकार ने सुनियोजित तरीके से इन चुनावों को टालने की साजिश रची। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने राज्य चुनाव आयोग से टकराव लिया और प्रशासन को आयोग के निर्देशों का पालन करने से रोका, जिससे वोटर लिस्ट, रोस्टर और चुनाव से जुड़ी आवश्यक प्रक्रियाएं प्रभावित हुईं।
उन्होंने कहा कि इसके बाद 8 अक्टूबर को डिजास्टर एक्ट का सहारा लेकर चुनावों को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने का प्रयास किया गया, जो सीधे तौर पर संवैधानिक संकट की स्थिति पैदा करता है। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा 30 अप्रैल 2026 तक चुनाव कराने के स्पष्ट निर्देश दिए जाने के बावजूद सरकार का रवैया टालमटोल वाला बना रहा और मामला सुप्रीम कोर्ट तक ले जाया गया, जिससे सरकार की नीयत पर सवाल खड़े होते हैं।
रणधीर शर्मा ने कहा कि 31 मार्च को रोस्टर जारी करने की बजाय सरकार ने बैकडेट में 30 मार्च 2026 की अधिसूचना जारी कर दी, जिसमें उपायुक्तों को 5 प्रतिशत तक रोस्टर बदलने का अधिकार दिया गया। उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 243(D) का सीधा उल्लंघन बताते हुए कहा कि इस प्रकार का कोई भी निर्णय बिना विधायिका की अनुमति के नहीं लिया जा सकता।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह 5 प्रतिशत की बात केवल दिखावा है, जबकि वास्तविकता में पूरे रोस्टर के साथ छेड़छाड़ कर चुनाव को प्रभावित करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह केवल 5% सीटों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सभी सीटों पर आरक्षण व्यवस्था में हस्तक्षेप कर धांधली करने की तैयारी है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस निर्णय में न तो राज्य चुनाव आयोग से कोई परामर्श लिया गया और न ही पूर्व प्रकाशन की संवैधानिक प्रक्रिया का पालन किया गया। रात के अंधेरे में कैबिनेट से मंजूरी लेकर इस प्रकार की अधिसूचना जारी करना तानाशाही का स्पष्ट उदाहरण है।
रणधीर शर्मा ने कहा कि यह फैसला पंचायती राज अधिनियम और संविधान दोनों की मूल भावना के खिलाफ है तथा इससे आरक्षण रोस्टर की पारदर्शिता पूरी तरह खत्म हो जाएगी। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि इस गंभीर विषय पर नियम 67 के तहत विस्तृत चर्चा कराई जाए ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके।
अंत में उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार लोकतंत्र को कमजोर कर रही है और जानबूझकर ऐसे निर्णय ले रही है जिससे चुनाव टाले जा सकें, क्योंकि उन्हें अपनी हार का स्पष्ट अंदेशा है।

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