मुख्यमंत्री कार्प मत्स्य पालन योजना से सुरेंद्र पाल का जीवन बना अधिक खुशहाल
हिमाचल प्रदेश में मत्स्य पालन, बेरोज़गार युवाओं के लिए बेहतर आय और आर्थिक सशक्तिकरण का संबल बनकर उभर रहा है। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री कार्प मत्स्य योजना इस दिशा में आशा की किरण बन गई है।
प्रदेश सरकार द्वारा किसानों, युवाओं और बेरोज़गारों की आय बढ़ाने तथा उन्हें स्वरोज़गार से जोड़ने के लिए क्रियान्वित की जा रही मुख्यमंत्री कार्प मत्स्य पालन योजना ग्रामीण क्षेत्रों में परिवर्तन की नई इबारत लिख रही है। यह योजना न केवल मत्स्य उत्पादन को प्रोत्साहित कर रही है, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था और पोषण स्तर को भी सुदृढ़ बना रही है।
सोलन ज़िला के नालागढ़ उपमंडल के गंसोत गांव के निवासी सुरेंद्र पाल ने मुख्यमंत्री कार्प मत्स्य योजना का लाभ उठाकर एक मिसाल कायम की है। इससे पूर्व 15 बीघा भूमि पर कृषि करने वाले सुरेंद्र पाल ने प्रदेश सरकार की इस योजना से प्रेरणा लेकर अपनी 5 बीघा भूमि पर मत्स्य पालन की शुरुआत की।
सुरेन्द्र पाल ने सर्वप्रथम योजना के विषय में मत्स्य पालन विभाग से पूरी जानकारी प्राप्त की। उन्होंने विभाग को अपनी परियोजना सौंपी और स्वीकृति के उपरांत विभाग द्वारा उन्हें मछली पालने के लिए तालाब निर्माण करने के लिए 80 प्रतिशत अनुदान अर्थात 3.20 लाख रुपए की अनुदान राशि प्राप्त हुई।
सुरेन्द्र पाल को विभाग से 3200-3200 वर्ग मीटर के दो तालाब निर्माण के लिए सहायता राशि प्राप्त हुई। उन्होंने इन तालाबों में मत्स्य पालन आरम्भ किया और आशातीत सफलता के साथ बेहतर आय प्राप्त करनी आरम्भ की। वर्तमान में सुरेन्द्र पाल मत्स्य पालन के माध्यम से न केवल अपनी आजीविका को मज़बूत कर रहे हैं अपितु दो अन्य लोगों को रोज़गार उपलब्ध करवाकर उनके जीवन को बेहतर बनाने में सहायक भी सिद्ध हो रहे हैं।
सुरेंद्र पाल का कहना है कि मुख्यमंत्री कार्प मत्स्य पालन योजना ने उनके जीवन की दिशा में सकारात्मक परिवर्तन लाया है। उन्हें खेती की तुलना में अब मत्स्य पालन से अधिक आय हो रही है और परिवार की स्थिति में सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है। उन्होंने इस योजना को प्रदेश में लागू करने के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का आभार व्यक्त किया।
योजना के संदर्भ में मत्स्य बीज फार्म नालागढ़ के वरिष्ठ अधिकारी राजिन्द्र पाल ने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में उपमंडल नालागढ़ के 03 लाभार्थियों को लगभग 08 लाख रुपए का अनुदान प्रदान किया गया। वर्ष 2025-26 में भी 03 नए लाभार्थियों को चयनित कर लगभग 10.50 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की गई है तथा अन्य किसानों की भूमि चयन प्रक्रिया जारी है।
उन्होंने कहा कि किसान और बेरोज़गार युवा अब मत्स्य पालन को एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में अपना रहे हैं। किसानों को मछलियों की विभिन्न स्वदेशी एवं विदेशी किस्मों के बीज नालागढ़ फार्म से ही न्यूनतम मूल्य पर उपलब्ध करवाए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में नालागढ़ फार्म के जलाशयों में लगभग 5.75 लाख मत्स्य बीज का उत्पादन हुआ। इसमें से लगभग 2.65 लाख बीज किसानों को विक्रय किए गए, जबकि 3.10 लाख बीज प्रदेश के जलाशयों में संग्रहित किए गए। इस प्रक्रिया से फार्म को लगभग 6.58 लाख रुपए का राजस्व भी प्राप्त हुआ।
मुख्यमंत्री कार्प मत्स्य पालन योजना के अंतर्गत मछली पालन तालाब निर्माण के लिए सामान्य वर्ग को 80 प्रतिशत तथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिला एवं दिव्यांगजन को 60 प्रतिशत तक की सहायता प्रदान की जाती है। सभी वर्ग के किसान योजना के तहत आवेदन कर सकते हैं। बेरोज़गार युवाओं और नए आवेदकों को प्राथमिकता दी जाती है। योजना के अंतर्गत रोहू, कतला, मृगल, कॉमन कार्प, ग्रास कॉप जैसी मछलियां पाली जाती हैं।
योजना के तहत प्रति लाभार्थी अधिकतम 0.5 एकड़ जल विस्तार क्षेत्र तक की इकाई पर सहायता दी जाती है। मत्स्य पालकों को उर्वरक, चूना, विटामिन मिश्रण, कीटनाशक इत्यादि के लिए भी सहायता दी जाती है।
आवेदन सम्बन्धित ज़िला अथवा मण्डल के मत्स्य पालन विभाग में जमा करवाए जा सकते हैं। ‘पहले आओ पहले पाओ’ के आधार पर सहायता मिलती है।
मुख्यमंत्री कार्प मत्स्य पालन योजना से मत्स्य पालक एक हैक्टेयर तालाब क्षेत्र में मछली पालन से लाखों रुपए की आय अर्जित कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री कार्प मत्स्य पालन योजना ने ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता और समृद्धि की राह को और मज़बूत बनाया है। युवा इस योजना से स्वरोज़गार के माध्यम से अपनी और अन्य के जीवन को सफल बना सकते हैं।


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