15 जुलाई 2026 तक जनगणना के तहत गृह गणना का कार्य निर्धारित…….
हिमाचल प्रदेश में 16 जून से शुरू होने जा रही जनगणना की गृह गणना प्रक्रिया से पहले शिक्षकों और प्रशासन के बीच जिम्मेदारियों के बंटवारे को लेकर विवाद गहरा गया है। राजकीय टीजीटी कला संघ ने आरोप लगाया है कि जनगणना जैसे महत्व पूर्ण राष्ट्रीय कार्य में शिक्षकों के साथ दोहरा मापदंड अपनाया जा रहा है। जहां अन्य विभागों के कर्मचारियों को कार्यालय समय में जनगणना कार्य के लिए पूर्ण रूप से रिलीव किया जा रहा है,वहीं शिक्षकों को पूरे दिन स्कूलों में शिक्षण कार्य करने के बाद जनगणना की जिम्मेदारी निभाने के आदेश दिए गए हैं।
संघ ने इसे न केवल अव्यावहारिक,बल्कि समान कार्य के लिए समान समय के सिद्धांत के भी विपरीत बताया है। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि सभी कर्मचारियों को एक जैसा जनगणना कार्य करना है तो शिक्षकों को भी उतना ही समय मिलना चाहिए जितना अन्य विभागों के कर्मचारियों को उपलब्ध कराया जा रहा है। राजकीय टीजीटी कला संघ के प्रदेशाध्यक्ष सुरेश कौशल,उपाध्यक्ष विजय बरवाल तथा राज्य महासचिव विजय हीर ने बताया कि 16 जून से 15 जुलाई 2026 तक जनगणना के तहत गृह गणना का कार्य निर्धारित किया गया है।
पहले चरण में सबसे अधिक तैनाती शिक्षा विभाग के कर्मचारियों और शिक्षकों की हुई है। इसके बावजूद कई जिलों में प्रशासन ने शिक्षकों को विद्यालय समय के बाद तथा अवकाश के दिनों में ही जनगणना कार्य पूरा करने के निर्देश जारी किए हैं।संघ के अनुसार हमीरपुर, कुल्लू और चंबा जिलों में जारी आदेशों के तहत शिक्षकों को स्कूल में पूरा दिन पढ़ाने के बाद जनगणना कार्य करना होगा। ऐसे में निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्य पूरा करना अत्यंत कठिन होगा। उनका कहना है कि जनगणना का कार्य केवल औपचारिकता नहीं है,बल्कि प्रत्येक घर तक पहुंचकर विस्तृत जानकारी एकत्र करने की जिम्मेदारी है, जिसमें पर्याप्त समय और संसाधनों की आवश्यकता होती है।
संघ ने यह भी मुद्दा उठाया है कि जनगणना ऐप केवल एंड्रॉयड-12 या उससे ऊपर के संस्करण वाले मोबाइल फोन में सुचारू रूप से कार्य कर रही है। ऐसे में जिन शिक्षकों के पास पुराने मोबाइल हैं, उन्हें नए और महंगे स्मार्टफोन खरीदने की मजबूरी झेलनी पड़ रही है। इस अतिरिक्त आर्थिक बोझ को लेकर भी शिक्षकों में असंतोष है।महिला शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर भी संघ ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। पदाधिकारियों का कहना है कि यदि शिक्षक विद्यालय से शाम 3 या 4 बजे के बाद जनगणना कार्य के लिए निकलेंगे तो वार्ड के अंतिम घर तक पहुंचने और सर्वेक्षण पूरा करने में देर रात हो सकती है।
ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में यह स्थिति महिला शिक्षकों की सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकती है। वहीं निजी वाहन न होने की स्थिति में कई शिक्षकों के लिए घर वापसी भी कठिन हो जाएगी। संघ का कहना है कि शिक्षकों को जनगणना कार्य के लिए वास्तविक रूप से केवल अवकाश वाले दिन ही उपलब्ध हो पा रहे हैं। 17 जून, 21 जून,26 जून,28 जून,29 जून, 5 जुलाई और 12 जुलाई सहित कुल सात अवकाश दिवसों में 30 दिनों का कार्य पूरा करने की अपेक्षा करना व्यवहारिक नहीं है।
दूसरी ओर गैर-शिक्षक कर्मचारियों को पूरा एक माह इस कार्य के लिए दिया गया है। पदाधिकारियों ने कहा कि जनगणना अधिनियम की धारा 15-ए के तहत लगाई जाने वाली ड्यूटी में ‘पार्ट टाइम’ कार्य का कोई प्रावधान नहीं है। इसके अतिरिक्त मानसून के आगमन के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में लोग खेती-बाड़ी के कार्यों में व्यस्त हो जाते हैं और कई बार घरों पर नहीं मिलते।
ऐसे में एक परिवार की जानकारी दर्ज करने के लिए दो से तीन बार तक जाना पड़ सकता है। इसलिए जनगणना जैसे व्यापक कार्य को केवल विद्यालय समय के बाद पूरा कर पाना संभव नहीं है। संघ ने यह भी तर्क दिया कि 12 जुलाई से समर क्लोजिंग वाले विद्यालयों में अवकाश आरंभ हो जाएगा, जिससे जनगणना कार्य और विद्यालयी व्यवस्थाओं के बीच समन्वय की समस्या बढ़ सकती है। ऐसे में शिक्षकों को पहले पूर्णकालिक रूप से गृह गणना कार्य पूरा करने का अवसर दिया जाए और उसके बाद सुपरवाइजर की सहमति मिलने पर विद्यालयों के लिए रिलीव किया जाए, ताकि वे पुन: पूर्ण समय शिक्षण कार्य कर सकें।
इसी मांग को लेकर राजकीय टीजीटी कला संघ के प्रतिनिधिमंडल ने सोलन में जनगणना निदेशक से भेंट कर ज्ञापन सौंपा और स्थिति में तत्काल सुधार की मांग की। संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि शीघ्र ही आदेशों में संशोधन कर शिक्षकों को अन्य विभागों के कर्मचारियों के समान पूर्णकालिक जनगणना अवधि उपलब्ध नहीं कराई गई, तो संगठन न्यायिक विकल्प अपनाने से भी पीछे नहीं हटेगा। शिक्षकों का कहना है कि वे जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्य से पीछे नहीं हट रहे,बल्कि केवल इतना चाहते हैं कि उन्हें भी वही समय और सुविधाएं मिलें जो अन्य विभागों के कर्मचारियों को प्रदान की जा रही हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मांग पर क्या रुख अपनाता है और शिक्षकों की चिंताओं का समाधान किस प्रकार किया जाता है।


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