कांग्रेस राज में भ्रष्ट और बेलगाम अफसरों को खुली छूट, भाजपा ने लगातार उठाए हैं भ्रष्टाचार के मुद्दे : संजीव कटवाल
विवादित बयान नहीं, असली सवाल भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलता का है, मुख्यमंत्री की चुप्पी चिंताजनक
शिमला। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री संजीव कटवाल ने लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह की विवादित सोशल मीडिया पोस्ट और उससे उपजे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हिमाचल प्रदेश का प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह से दिशाहीन और बेलगाम हो चुका है। उन्होंने कहा कि आज स्थिति यह है कि सत्ता के संरक्षण में कुछ अधिकारी खुद को जवाबदेही से ऊपर समझने लगे हैं और भ्रष्टाचार के मामलों पर सरकार जानबूझकर आंखें मूंदे बैठी है।
संजीव कटवाल ने स्पष्ट किया कि भाजपा ने कभी भी ईमानदार अधिकारियों का विरोध नहीं किया, बल्कि पार्टी ने हमेशा कर्तव्यनिष्ठ और प्रदेश के हित में कार्य करने वाले अधिकारियों का सम्मान किया है। लेकिन यह भी उतना ही सच है कि भाजपा ने बीते समय में बार-बार भ्रष्ट सरकारी अफसरों, वित्तीय अनियमितताओं, कमीशनखोरी और जनता के पैसों की लूट से जुड़े मामलों को मजबूती से उठाया है। चाहे मामला केंद्र से मिलने वाली धनराशि के दुरुपयोग का हो या विकास कार्यों में भ्रष्टाचार का, भाजपा ने हर मंच पर सरकार से जवाब मांगा है।
उन्होंने भाजपा उपाध्यक्ष एवं सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि जिस तरह से प्रदेश के बाहर से आए वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को लेकर सार्वजनिक और सोशल मीडिया मंचों पर टिप्पणियां की गई हैं, वह न केवल संवैधानिक मर्यादाओं के खिलाफ हैं, बल्कि हिमाचल की उस परंपरा को भी चोट पहुंचाती हैं, जहां देश के हर कोने से आए अधिकारियों ने देवभूमि की सेवा समर्पण भाव से की है। ऐसे बयान मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास हैं।
संजीव कटवाल ने कहा कि असली मुद्दा यह नहीं है कि अधिकारी कहां से आए हैं, बल्कि यह है कि वे अपना कार्य ईमानदारी से कर रहे हैं या नहीं। यदि कोई अधिकारी या सत्ता से जुड़ा व्यक्ति भ्रष्टाचार में लिप्त है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि कांग्रेस सरकार में मंत्री और अधिकारी गैर-जिम्मेदार बयान दे रहे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री की ओर से न तो कोई स्पष्ट रुख सामने आ रहा है और न ही किसी तरह की अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है। यह चुप्पी या तो भ्रष्टाचार पर मौन सहमति को दर्शाती है या फिर प्रशासन पर सरकार की कमजोर पकड़ को—दोनों ही स्थितियां प्रदेश के लिए खतरनाक हैं।
उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी संविधान और सेवा नियमों के तहत निष्पक्ष रूप से कार्य करें, यही लोकतंत्र की बुनियाद है। राजनीतिक संरक्षण के भरोसे मर्यादाहीन बयानबाजी और मनमानी न केवल अनुशासनहीनता है, बल्कि इससे जनता का विश्वास भी टूटता है। भाजपा यह साफ कर देना चाहती है कि प्रदेश की गरिमा, जनता के सम्मान और भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं होगा।
संजीव कटवाल ने मांग की कि मुख्यमंत्री इस पूरे मामले पर तुरंत सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करें, विवादित बयानों पर जवाबदेही तय करें और यह सुनिश्चित करें कि हिमाचल प्रदेश में प्रशासनिक अनुशासन, पारदर्शिता और सौहार्द को किसी भी कीमत पर कमजोर न होने दिया जाए। उन्होंने दो टूक कहा कि भाजपा भ्रष्टाचार और कुशासन के खिलाफ पहले भी आवाज उठाती रही है और आगे भी पूरी मजबूती से लड़ाई जारी रखेगी।


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